सम्बन्ध
┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈ मनहरण घनाक्षरी छंद शीर्षक: सम्बन्ध ┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈ चाहें अनुशासन तो, उच्च पद आसन तो, इसके लिए पिता की, *फटकार चाहिए।* सहने हों सारे ग़म, रुकें न बढ़ें कदम, इसके लिए तो माँ की, *डांट-प्यार चाहिए।* मिले न कभी भी धोखे, बीच में सहोदरों के, हंसी छेड़छाड़ थोड़ी, *तकरार चाहिए।* लालसा जीवन की है, सबके ही मन की है, घरवाली का भी प्यार, *बेशुमार चाहिए।* जाए जीवन संवर, सुखी बन जाए घर, बच्चों में सुरक्षा भाव, *भी अपार चाहिए।* दादा-दादी पोता-पोती, काका-काकी ताया-ताई, खुशियों को भरापूरा, *परिवार चाहिए।* बिन बोले जाने भाषा, मित्र मित्रता की आशा, सुख जैसा दुख में भी, *अधिकार चाहिए।* गुरु देवता समान, मिले सभी गूढ़ ज्ञान, पूजें कर जोड़ उन्हें, *बारम्बार चाहिए।* ┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈ स्वरचित मौलिक रचना रामचन्द्र श्रीवास्तव कवि, गीतकार एवं लेखक नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ संपर्क सूत्र: 6263926054 ┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈