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आजादी गाथा

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।।गीत।।         आजादी गाथा… आजादी की ये गाथा तो,          हमें सब मिल के गाना है!  बड़ी कीमत चुकाई है,           नहीं ये भूल जाना है!                  (१) जिन्होंने दी है कुर्बानी,             उन्हें हम याद करते है!  जजबा जो मिला उनसे,            लिए सीने में फिरते हैं ! दिया है जिम्मेदारी जो,          हमें मिलकर निभाना है!  आजादी की….                    (२) नया ये आज भारत है,      सफल है और सबल भी हैं। दुश्मन में कहां हिम्मत,       अटल भी हैं अचल भी है.. रखेंगे हम इसे अक्षुण,      कसम ये हमको खाना है! आजादी की …. जय हिंद! ✍️ विरेन्द्र शर्मा “अनुज”

आजादी- गाथा

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 . ।।आजादी- गाथा।।                         ✍️ विरेन्द्र शर्मा “अनुज” “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””"""""                          (1) ऐ मेरे वतन के लोगों,            ना करो कोई नादानी। मुश्किल से मिली आजादी,             फेरो ना उस पर पानी।                             (2) तैतीस कोटि क्षुब्ध हृदय ने,             जब अपने मन में ठानी। तब जाकर मिली आजादी,              न जाने कितनों ने दी कुर्बानी।                              (3) व्यापार का ...

राम वनवास नहीं जाते तो

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।। राम वनवास नहीं जाते तो ।।              ✍️ विरेन्द्र शर्मा "अनुज" """"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""" यदि माता कैकेयी, ना होती, तो राम वनवास, नहीं जाते। ना ही सीता, हरण हुआ होता, ना रावण ही, मारा जाता। ऐसी बहुत सी भ्रांतियां, बहुधा, मानव मन में, लगा उठने। समझ में जिसकी, जो आया, अपनी अपनी सोच, रखा उसने। कृष्ण ने कहा, सुनो अर्जुन, जो कहते युद्ध नहीं, करोगे तुम। तब भी सब, मारे जायेंगे, किसी भ्रम में नहीं, पड़ो ना तुम। भगवदगीता का, हरेक शब्द, ब्रह्म से निकला, ज्ञान है। होनी तो पहले से, तय होता, कर्म प्रेरणा से, होता संज्ञान है। यदि राम, वनवास नहीं जाते, तो राजा राम, मृगया को जाते। तब ...

राम जन्म भूमि

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।।राम जन्म भूमि।।                   ✍️ विरेन्द्र शर्मा “अनुज” “”””””””””””””””””“””””””””””””””””””””””””” भारत भूमि अवधपुर गावहिं,              आज अयोध्या धाम कहावहिं!  विराज रहे हैं प्रभु निज धामा,               कौशिल्या सुत रघुकुल रामा!!  ढोल मृदंग मंजीरा साजे,                 शंख नगाड़ा दुंदुभि बाजे!  सजा अयोध्या दुल्हन जैसे,           पुलकित लोग बरनन करूँ कैसे!!  जिनके नाम काल डर जाहिं,        सोई दशरथ के राम कहावहिं!  बाल रूप तुम्ह करहु निवासा,           बेगि हरो प्रभु तम सब दासा!!  बरस पांच सौ कैसे बीता,               बिन तुम्हरे सरजू था रीता!  आज प्रभु तुम अति सुख दीन्हा,               भगतन की पीड़ा हर ...

रामनाम-नामावलि

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।। रामनाम-नामावलि।।                               ✍️ विरेन्द्र शर्मा “अनुज” “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” राम नाम से आंखें खुलती, आंखें बंद करें तो राम। राम बिना पत्ते ना हिलते,गिनती का आरंभ ही राम।। दादा राम पोता राम दादा के परदादा राम। काका राम बेटा राम, मामा राम भांचा राम।। दयाराम पुनिराम , ढालुराम गयाराम। आजूराम साजूराम, कालूराम मयाराम।। गन्नूराम धन्नुराम, झाड़ूराम जीतूराम। हीराराम मोतीराम, पूनाराम गीतूराम।। दुजराम तीजराम, चैतराम बैसाखूराम। झड़ीराम जेठूराम,कार्तिकराम फागूराम।। मंशाराम टीकाराम,खेलनराम मेलनराम। सीताराम गीताराम,भूलनराम झूलनराम।। रामपुकार रामबिशाल,रामदयाल रामकृपाल। रामप्रसाद रामनिवास,रामसनेही रामनिहाल।। रामकृष्ण रामकुमार, रामभरोसे रामअवतार। रामचरण रामशरण, रामनिशाद रामअधार।। रामानुज रामाचार्य, रामेश्वर रामपाल। रामाश्रय रामनिहोरे,रामाधीन रामलाल।। शिवराम विष्णुराम, हरेराम हरिराम। धनदराम सनदराम,कलिराम बलीराम।। धनउराम बनऊराम, सन...

मैं भी रचनाकार

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  . ।। मैं भी रचनाकार ।।                              ✍️ विरेन्द्र शर्मा (रायपुर) “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””""""" मेरी रचनाएं अब, लेने लगीं आकार है, जल ही मेरी प्रेरणा, जल ही मेरा आधार है। जल तो जल है, न कोई रंग ना स्वाद, जल ही जीवन है, जल से जीवन साकार है। जिस रंग में घोल दो, उसी रंग में रंग जाता, जिस पात्र में डालो,उसी का ले लेता आकार है। नमक डालो तो खारा, शहद घोलो तो मीठा, जल की बूंदों से सागर,जल ही नदियों की धार है। समंदर में गिरे तो खारा,गंगा में हो जाता गंगाजल, कुएँ मे गिरे तो मीठा, नाली में गिरे तो बेकार है। पर जहाँ भी गिरता, जिससे भी जल मिलता, बस वही उसका अपना, हो जाता संसार है। पर उसका मूल स्वरूप, होता है रंगहीन स्वादहीन, वही जीवन रक्षक पानी, जो उसका मूलाधार है। अंत में वह अपने, मूल स्वरूप को पा ही जाता है, बस उसी दृष्टांत से हम,मनुष्यों का भी सरोकार है।  जब ...

तलाशी

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  ।।तलाशी।। शिक्षक  शिष्य  की,  बात   चली  तो, एक    वाकिया  आज,  बतलाता   हूं। शिक्षक   शिष्य  के, मधुर  रिश्ते   का, एक   अनुपम   दर्शन,   करवाता   हूं। शिक्षक जी के, क्लास  में   एक  दिन, एक   छात्र   की,   घड़ी    हुई   चोरी। घड़ी   रखी    थी,  टेबल   पर    जब, किसी  छात्र ने  ही, हाथ  उसमे  फेरी। हुई    शिकायत,   कक्षा   शिक्षक   से, उन्होंने  शीघ्र, घटना का  लिया संज्ञान। सब  बच्चों  को, कमरे  में  रोक लिया, तलाशी  का  शुरू,   किया  अभियान। बोले सब  कर लो, अपनी  आंखें  बंद, एक  एक  की  अभी,  तलाशी   लूंगा। हिदायत  बस  कोई,  न  खोले  आंख, तलाशी  न जब...