राम के अंदर का भाव
राम वो नहीं जो द्वेष से भरा हो। राम वह मन है जो गिरे हुए लोगो को भी प्रेम से भरता हो। राम वो नहीं जो जीतकर अकड़पन लाए। राम वो है जो हारकर भी कदमों को आगे बढ़ाए। राम वो नहीं जो झूठ का सहारा लेता हो। राम वो है जो सच बोलने की हिम्मत रखता हो। राम वो नहीं जो अपमान की याद दिलाता हो। राम वो है जो अपमान सहकर भी अपमानित नहीं होने को सूचित करता हो। राम वो नहीं जो अपने स्वार्थ से चलता हो। राम वो है जो बिना बोले दूसरों के दर्द को अपना मानकर बिना बोले सहता हो। राम वो नहीं जहाँ दुर्भावना हो। राम वो है जहाँ दिलो में अच्छे विचार हों। राम वो नहीं जहाँ दुष्ट भाव हों। राम वो है जहाँ निर्मल भाव हर श्वास में और हर पुकार में हो। राम वहाँ नहीं जहाँ छल -कपट हो। राम वो है जो अपनी करुणा से राग द्वेष को भी मिटाता हो। राम वहाँ नहीं, जहाँ सोने का सिंहासन हो। राम वहाँ है जहाँ मन में, दिलो में , सदा सच्चे विचार हों। लिखने के लिए और भी है जहाँ राम की लीला अपरम्पार हो। ऐसा रूप लाल का हो , ऐसा ही राम हर मन ...