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राम ही जानते हैं

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राम ही जानते हैं राम जी के जीवन का दुःख, राम ही जानते हैं, राम ही जानते हैं। वचन निभाने छोड़ा घर, माता कैकेयी के कहने पर। भरत को दिया राज-सिंहासन, स्वयं चले वन में रहने पर। मानव जीवन के दुःख-सुख को, वह भली-भाँति पहचानते हैं, राम जी के जीवन का दुःख, राम ही जानते हैं, राम ही जानते हैं। भ्राता भरत को देख प्रसन्न होकर, गले लगाया राम जी ने। पिता के स्वर्ग सिधारने का समाचार सुन राजा होकर भी राम जी रोए थे। स्वर्ण-मृग के पीछे जब वे दौड़े, रावण सिया को हर ले गया था। सिया ने अपने आभूषण त्याग मार्ग का संकेत दिया था। सिया की खोज की उन रातों में, कैसे राजा सोए होंगे? एक-एक दिन सिया की विरह में, अवध के राजा भी रोए होंगे। मानव जीवन की हर पीड़ा को, वह भली-भाँति पहचानते हैं। राम जी के जीवन का दुःख, राम ही जानते हैं, राम ही जानते हैं। करन बघेल.. रायपुर

राम राम

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राम सिर्फ़ नाम नहीं है, उसके बिना होता कोई काम नहीं है। सुबह उठकर अगर राम कहूँ, तो दिन मेरा अच्छा हो जाता है। दादा जी से अगर राम-राम कहूँ, तो चेहरे पर मेरे निखार आता है। पड़ोसियों को अगर राम-राम कहूँ, तो उनके साथ रिश्ता अच्छा बन जाता है। दोस्तों को कॉल पर राम-राम कहने से, बात करने की शुरुआत अच्छी हो जाती है। राम का नाम सबके सामने लो, तो खुद का आचरण अच्छा कहलाता है। राम का नाम हर समय लो, तो ज़िंदगी राममय बन जाती है। विदेश की यात्रा पर भी मैं, राम की धरा का कहलाता हूँ। राम के आचरण को अपनाऊँ, तो सबके हृदय को भाता हूँ। राम के गुण अपनाकर मैं, सब दोस्तों को वही सिखाऊँगा। नशा करने वालों को भी, मैं राम के गुण सिखाऊँगा। नशे की लत छुड़वाकर, उन्हें मर्यादा में लाऊँगा। सियावर रामचंद्र की जय राम राम लेखक: करन बघेल

मैं इस युग का नहीं हूँ

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मैं इस युग का नहीं हूँ  मेरे जुबान पर तो हर समय राम राम है  हर नारी का मेरी नजरों सिर्फ सम्मान है  हाँ मैं शायद त्रेता युग का ही हूँ  मैं इस युग का नहीं हूँ  त्रेता युग में माँ का सम्मान था  लेकिन इस युग में नारी का अपमान है  त्रेता युग में माँ के लिए बेटे ने 14 वर्ष वनवास किया  इस युग में माँ तो वृद्धा आश्रम जा रही है  त्रेता युग में माँ ने वनवास में शिक्षा दे कर सबको  सम्मानित करवाया  इस युग में पैसे दे कर भी शिक्षा का कोई मोल नहीं है  त्रेता युग में नारी ने अग्नि परीक्षा दे कर पति का सम्मान बचाया  लेकिन इस युग में नारी तो पति को नीले ड्रम में डाल रही है  त्रेता युग के राज में राम थे जिनके चरणों में चारो धाम थे  इस युग में चारो धाम है  मगर किसी के जुबान पर राम नहीं  राम के राज्य में असुरों का बोल बाला है  यहाँ माँ के लिए बहन के लिए सिर्फ अभद्र भाषाए आती है लोगो के जुबान पर छोटी छोटी बातो पर माँ बहन को ला रहे है इस राम के पावन धरा को लोग  राक्षसों का गड़ बना रहे है  मज़ाक बना कर रख दिए है ...