सम्बन्ध



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मनहरण घनाक्षरी छंद

शीर्षक: सम्बन्ध

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चाहें अनुशासन तो, उच्च पद आसन तो,

इसके लिए पिता की,

*फटकार चाहिए।*


सहने हों सारे ग़म, रुकें न बढ़ें कदम,

इसके लिए तो माँ की,

*डांट-प्यार चाहिए।*


मिले न कभी भी धोखे, बीच में सहोदरों के,

हंसी छेड़छाड़ थोड़ी,

*तकरार चाहिए।*


लालसा जीवन की है, सबके ही मन की है,

घरवाली का भी प्यार,

*बेशुमार चाहिए।*


जाए जीवन संवर, सुखी बन जाए घर,

बच्चों में सुरक्षा भाव,

*भी अपार चाहिए।*


दादा-दादी पोता-पोती, काका-काकी ताया-ताई,

खुशियों को भरापूरा,

*परिवार चाहिए।*


बिन बोले जाने भाषा, मित्र मित्रता की आशा,

सुख जैसा दुख में भी,

*अधिकार चाहिए।*


गुरु देवता समान, मिले सभी गूढ़ ज्ञान,

पूजें कर जोड़ उन्हें,

*बारम्बार चाहिए।*


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स्वरचित मौलिक रचना

रामचन्द्र श्रीवास्तव

कवि, गीतकार एवं लेखक

नवा रायपुर, छत्तीसगढ़

संपर्क सूत्र: 6263926054

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