हो सफल


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हो सफल

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हो प्रबल,

हो अटल,

हो अचल,

हो सफल।


कह रहा,

धरातल,

कर्म कर,

हो सफल।


हो सबल,

पी गरल,

आ निकल,

हो सफल।


आज अभी,

ना हो कल,

रुक न तू,

हो सफल।


तू सम्हल,

तू बदल,

ना चपल,

हो सफल।


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स्वरचित मौलिक रचना

अर्चना श्रीवास्तव

कवयित्री

नवा रायपुर, छत्तीसगढ़

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