राष्ट्र-प्रेम


राष्ट्र-प्रेम


हे भारत के बाशिंदों।

राष्ट्र प्रेम दिखावे में नहीं कर्तव्य में हो।।

देश की एकता, अखण्डता सर्वोपरि हो।

हम एक ऐसा भारत बनाएं, जो सोने की चिड़िया हो।।

भारत का लक्ष्य विकास ही होना चाहिए।

विकास कोई भी क्षेत्र मे हो, होना ही चाहिए।।

चाहे सामाजिक, आर्थिक, राजनीति सुरक्षा के क्षेत्र हो।

भारत जननी जन्म भूमि से हमे प्यार हो।।

ऐसा भारत माता के लाल हो ।

भारत को विश्व गुरू बनाना है।।

तिरंगा शान से फहराना है।

आओ देश वासियों मिलकर राष्ट्र प्रेम जगाएं।।

घर घर जाकर राष्ट्रवाद के बारे मे बतलाएं।

जो पथ से भटक गये, उसे राष्ट्रप्रेमी बनाना है।।

हम सब मे विकास, एकता अखण्डता की होड़ लगाना है।

भारत माता के सिर पर सोने की मुकुट लगाना है।।

हर हिन्दुस्तानी के मन मे राष्ट्रप्रेम जगाना है।

हर हिन्दुस्तानी के मन मे राष्ट्रप्रेम जगाना है।।


जय हिन्द


स्वरचित

दिलीप कुमार श्रीवास्तव नया रायपुर (छ.ग.)

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