मेरा भी तो किरदार होगा
कहानी में कहीं मेरा भी तो किरदार होगा,
जहाँ मैं जंगजू जुल्मी मगर संसार होगा।
समय लेता हूँ पूरा और बहुत कुछ सोचता हूँ,
कि किस तरह से यह वार असरदार होगा।
मैं अपने दोस्तों पर भी नज़र रखने लगा हूँ,
न जाने कौन, कब, किस बात पर गद्दार होगा।
तड़पता छोड़ उसको दूर तक मैं चल दिया हूँ,
मगर अब सोचता हूँ वो बहुत लाचार होगा।
जुबां के ज़ोर से उस पर सितम ही कर रहा हूँ,
मेरे भीतर का मैं उसका ही गुनहगार होगा।
मैं जब बीते हुए लम्हों में खुद को देखता हूँ,
मुझे दिखता नहीं मुझसा कोई खूंखार होगा।
मोहल्ले में गमों की परत मोटी देखता हूँ,
न जाने कब यहाँ खुशियों का पारावार होगा।
मैं साजिश भूल कर उसको मुआफी दे चुका हूँ,
मगर वो खुद की ही नजरों में शर्मशार होगा।
अगर मैं हाथ पर यूं हाथ रखकर बैठता हूँ,
तो फिर किस तरह से दुनियावी कारोबार होगा।
किए अपराध जितने भी दुहाई मांगता हूँ,
कि इस तरह ही तेरा "राम" अब उद्धार होगा।
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स्वरचित मौलिक रचना
रामचन्द्र श्रीवास्तव
कवि, गीतकार एवं लेखक
नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
संपर्क सूत्र: 6263926054
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