ज़िन्दगी सी बन गया है



चिराग़ ए रौशनी बन ज़िन्दगी सी बन गया है।

वो मेरे वास्ते एक शायरी सी बन गया है।


हक़ीक़त है कि या है एक कहानी अक्स मेरा,

अजब वो एक पहेली मुख्तलिफ सी बन गया है।


बुरा वो दौर था भुला नहीं हूँ अब तलक जो,

चुनांचे डर मेरा मेरी कमी सी बन गया है।


तेरा बेखौफ अंदाज़ ए बयां भाता है मुझको,

तेरा मासूम सा चेहरा खुशी सी बन गया है।


तुझे इनकार करने की नहीं हिम्मत ज़रा भी,

मेरा गर्दन हिलाना भी नहीं सी बन गया है।


अधूरापन हुआ काफ़ूर जब से आ गया तू,

तू मेरा आसमां मेरी ज़मीं सी बन गया है।



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स्वरचित मौलिक रचना

रामचन्द्र श्रीवास्तव

कवि, गीतकार एवं लेखक

नवा रायपुर, छत्तीसगढ़

संपर्क सूत्र: 6263926054

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