"युवान" आए हैं

 

साथ तो है परिवार का, दोस्तों का,

सहकर्मीयों और अपनों का।

भाग दौड़ में जिंदगी व्यस्त नही अस्त व्यस्त है,

आखिर पीछा जो कर रहे हैं सपनों का ।


इस जिंदगी की दौड़ में,

तभी मिली एक छांव।

जब नन्हें मेहमान के,

घर में पड़े पांव।


जिंदगी को सुकून का मरहम लग गया।

दिन तो यूं गुजरने लगे मानो, पर लग गया।


उसकी हर मुस्कान से जिंदगी में रंग यूं भरा हुआ,

मानो सूने बादल में इंद्रधनुष हो बना हुआ।


संदेशे बांटने खुशियों के नन्हें मेहमान आए हैं,

हम खुश हैं आज बहुत मेरे घर "युवान" आए हैं।

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