अर्जी सुन लो राम
मेरी अर्जी सुन लो राम, मेरा जीवन सफल कर दो।
संग-संग चल लो राम, मेरी राह सरल कर दो।
पापी हूँ मैं, अधमी हूँ, प्रभु, तेरा ही सहारा है।
ना आस रहा जग का, सब कुछ ही दिखावा है।
मेरी नाव डूबी मझधार, प्रभु, आके बचा लेना।
हे कृपा सिंधु दाता, जग के पालन कर्ता।
कभी धैर्य ना खोयें हम, बस पकड़ें धर्म रस्ता।
आहत हूँ जग से, तेरा ही सहारा है।
शिव धनुष भंग करके, प्रभु सीता संग ब्याह रचा।
नहीं कोई था जग में, जो धनुष उठा सका।
न तुमसा कोई वीर, ना कोई ज्ञानी होगा।
शबरी के बेर का मीठापन, तुमसे है भगवन।
केवट का ज़िद्दीपन, तुमसे है भगवन।
मेरी नैया पार लगाओ प्रभु, बड़ी दूर किनारा है।
रख मान वचन का तुम, वन-वन भटके हो राम।
सहनशील और त्याग में, अग्रणी हो राम।
मर्यादित रहकर तुम, मर्यादा सिखाते हो।
कर बाली का अंत, मित्रता का मिसाल दिया।
मृत शीला को जिला करके, अहिल्या का उद्धार किया।
मेरे अधर में अटके प्राण, प्रभु, आके बचा लेना।
पंछी का कलरव तुमसे, बगिया में महक तुमसे।
है चांद में शीतलता, सूरज में तपन तुमसे।
जिस ओर नज़र जाता,तेरा ही नज़ारा है।
अब तेरे सिवा रघुवर , कोई ना हमारा है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें