जय श्री राम, जय श्री राम
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शीर्षक: जय श्री राम, जय श्री राम
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एक ही नारा, एक ही नाम, जय श्री राम, जय श्री राम।
पुण्य प्रतापी एक ही धाम, जय श्री राम, जय श्री राम।
वट की छाया जब हो घाम, जय श्री राम, जय श्री राम।
सबके दाता राजा राम, जय श्री राम, जय श्री राम।
अवधपुरी के राजपुत्र हैं, चलते ठुमक ठुमक कर।
सब जन उनका दर्शन चाहें, चाहे दुबक दुबक कर।
सबके राजदुलारे राम, जय श्री राम, जय श्री राम।
सबके दाता राजा राम, जय श्री राम, जय श्री राम।
माता पिता की आज्ञा पाकर, बन बैठे वनवासी।
उनके ना होने पर पूरे अवध में आज उदासी।
दशरथ रोज पुकारें राम, जय श्री राम, जय श्री राम।
सबके दाता राजा राम, जय श्री राम, जय श्री राम।
धर्म पताका लहराने को पृथ्वी लोक में आए।
असुर जनों के अत्याचार से साधू संत बचाए।
विष्णु के अवतारी राम, जय श्री राम, जय श्री राम।
सबके दाता राजा राम, जय श्री राम, जय श्री राम।
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स्वरचित मौलिक रचना
अर्चना श्रीवास्तव
कवयित्री
रायपुर, छत्तीसगढ़
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