मर्द


शीर्षक - मर्द 


क्यों कहते हैं कि मर्द को दर्द नहीं होता?

कौन कहता है की लड़के रोते नहीं?


भावनाएं, संवेदनाएं तो उनमें भी होती हैं,

घर की याद, अपनों की उम्मीदें, उनको भी तो सताती हैं।


और इतना सख्त मजबूत कैसे बना दिया हमने,

उनके जज्बातों को लड़का समझ नजर अंदाज करके।


तुम बस अपना सपना पूरा करो, 

पैसे की परवाह मत करो, ये कहने वाला, 

उनके नसीब में कहां होता है।


दिल उनका भी तो टूटता है,

कोशिशें उनकी भी तो हारती हैं, 

परेशानियां उनको भी तो बेचैन करती हैं,

और अपनों का साथ, घर की याद, 

उनको भी तो सताती है।


फिर कैसे दर्द ना हो मर्द को,

और कैसे छलके न आंखें लड़कों की।


उन्हें शिकायतों से परे समझने वाला चाहिए, 

सही-गलत, जीत-हार से परे अपनाने वाला चाहिए, 

उन्हें गले लगकर रो लेने दो,

दिल की बात खुलकर कह लेने दो।


क्योंकि मर्द को दर्द होता है,

और लड़के भी रोते हैं।


✍️

स्वरचित कविता 

तुलसी साहू 

मगरलोड, धमतरी छग

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