मेरे आसमां का चांद



शीर्षक - मेरे आसमां का चांद

मेरी कमियां मुझे ही पूरा करने दे, 
मेरे आसमां का चांद मुझे ही बनने दे। 

जिंदगी अगर युद्धभूमि है, 
तो मेरी लड़ाई मुझे ही लड़ने दे।
मेरे आसमां का चांद ......

थोड़ा गिरने दे, थोड़ा रोने दे, 
अगर हालात और जज्बात इम्तिहान लेते हैं,
तो बेशक मुझे इन मुश्किलों से गुजरने दे।
मेरे आसमां का चांद ....

सुना है हार, आलोचनाएं और लोग हौसला तोड़ देते हैं,
सहते-सहते सब्र भी साथ छोड़ देते हैं,
टूट-टूट कर मुझे खुद को जोड़ने दे।
मेरे आसमां का चांद.... 

अक्सर सपनों और जिम्मेदारियों के बीच जंग चलती हैं, 
सपनें अपनी ओर खींचते हैं,
और ये जिम्मेदारियां सपनों से दूर करती हैं,
मुझे सपनों और जिम्मेदारियों का साथ निभाने दे।
 मेरे आसमां का चांद.....

इतनी उम्मीद तो है जिंदगी से,
हर रात सवेरा लाती है,
हर ठोकर मंजिल तक पहुंचने का पैगाम देती है,
मेरे संघर्ष से मुझे मेरा इतिहास रचने दे।
मेरे आसमां का चांद मुझे ही बनने दे।

स्वरचित कविता 
तुलसी साहू 
मगरलोड, धमतरी छग

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