सांसें राम की मर्यादा पुरुषोत्तम राम की


सांसें राम की मर्यादा पुरुषोत्तम राम की


कहां सांसें अपनी थी श्री राम की।

बस एक समय सारणी थी त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम राम की।

 

यह एक कहानी बनी थी जब रामायण के नाम की।

त्रेता युग में दशरथ के घर जन्मे चारों भैया राम की।


बालपन में श्री वाल्मीकि आश्रम में लिया विद्या के संग अनुभव अपार।

यही शुरुआत हुई थी मर्यादा संग संस्कार के गहरे विचार। 


युवावस्था आई जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम की।

दिन दिवस वर्ष दशक बढ़ने लगी मर्यादा श्री राम की।


श्री राम के नाम के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम को जोड़ने के लिए। सांसें कम पड़ गई थी श्री राम को सीता वियोग में जोड़ने के लिए। 


वनवास का संयोग सीता का वियोग लव कुश द्वारा मिले कटाक्ष भजन।

इन सबको सहने के बाद किया श्री राम ने अपनी सांसों को जल में दमन।

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