बाल राम मुस्काते हैं
देखो बाल राम मुस्काते हैं,
हृदय में सबके करुणा बरसाते हैं।
धरती फूलों सी मुस्काती,
हर एक खेत खुशियों से लहलहाते हैं ।
देखो बाल राम मुस्काते हैं,
ये जन्म नहीं एक बालक का।
ये तो एक नए युग का जन्म है,
जन्म यही है भगवा पताके के स्थापक का ।
देखो बाल राम मुस्काते हैं,
गोदी में खेल रहे माता के।
जो नाभी से जन्माते ब्रह्मा को,
चक्र सुदर्शन घुमाने वाले पिरो रहे प्रेम नातों के।
देखो बाल राम मुस्काते हैं,
टेढ़ी–मेढ़ी चाल चले रुनझुन रुनझुन पायल संग।
जो करदे सीधा दुष्टों को अपनी एक चाल से,
वो दिखा रहे संसार को अपने बालपन का रंग।

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