जय श्री राम


कई ज़माने बाद लिखने बैठी आज,

मिला था विषय श्री राम जी पर लिखने को,

फिर सोचते ही बैठ गई आखिर,

लिखूं ही क्या जय श्री राम के अलावा?


जिस जय श्री राम को लिखते ही,

पत्थर भी तैरने लगे थे समंदर पर,

और बन गया था राम सेतु।

उसकी व्याख्या भला मैं कैसे करूं?


जिस जय श्री राम के उच्चारण मात्र से,

लांघ गए कई कोस समंदर,

 को भक्त हनुमान।

उसकी व्याख्या भला मैं कैसे करूं?


जिस जय श्री राम के स्मरण मात्र से,

नन्हीं गिलहरियों ने बना,

दिया था रेत से रास्ता।

उसकी व्याख्या भला मैं कैसे करूं?


जिस जय श्री राम के बल से,

चीर दिखाया था सीना अपना,

भरी सभा में भक्त हनुमान ने।

उसकी व्याख्या भला मैं कैसे करूं?


जिस जय श्री राम की व्याख्या मे,

ना बचेंगे दिन और रात,

और न पूरेगा जीवन मेरा।

उसकी व्याख्या भला मैं कैसे करूं?


बस कहना चाहूं यही बात,

दिल से बोलो बस एक बार,

जय श्री राम बनेंगे,

सबके बिगड़े काम ।

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