आज मन शांत है


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शीर्षक: आज मन शांत है

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अहम की दीवार गिर चुकी है,

विचार शुद्ध हैं।

लोगों की आलोचना से भी,

मन नहीं क्रुद्ध है।

आज मन शांत है।


लोग क्या कह रहे हैं,

कोई फर्क नहीं।

कहीं कोई उलझन,

तर्क, कुतर्क नहीं।

आज मन शांत है।


दैनिक गृहकार्य रुचिकर हैं,

नहीं कोई खिन्नता।

हृदय में है तो केवल,

प्रसन्नता ही प्रसन्नता।

आज मन शांत है।


संतोष भी, खुशी भी,

स्वयं पर नियंत्रण है।

लग रहा है स्वयं भगवान,

मेरे साथ प्रतिक्षण हैं।

आज मन शांत है।


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स्वरचित मौलिक रचना

अर्चना श्रीवास्तव

कवयित्री

रायपुर, छत्तीसगढ़

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